Friday, 26th May 2017

युवा में बढ़ता हैड नेक कैंसर का खतरा

Tue, Jul 26, 2016 5:16 PM

वर्ल्ड हैड नेक कैंसर डे - 27 जुलाई

भोपाल  देशभर में प्रतिवर्ष दस लाख से अधिक मुख और गले के कैंसर रोगी सामने  रहे हैऔर जिनमें से 50 प्रतिशत की मौत बीमारी कीपहचान के अंतराल में ही हो जाती है। इसमें युवा अवस्था में होने वाली मौतों का कारण भी मुंह  गले का कैंसर मुख्य है। हालांकि पूरी दुनियंाभर में विश्वगला  सिर कैंसर दिवस आज ही के दिन मनाया जा रहा है लेकिन अभी तक इससे होेने वाली मौतेंा पर सरकार पूरी तरह से रेाक लगाने में असफल सीसाबित हो रही है। पिछले 16 सालों में मुख और गले के कैंसर रोगियेां की संख्या पुरुषों और महिलाअेंा में तीव्र गति से बढ़ती जा रही है। इसका खुलासाएशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में जारी रिपोर्ट में हुआ है।

वायस ऑफ टोबेकों विक्टिमस (वीओटीवीके संरक्षक डाटी.पीशाहू ने बताया कि देशभर में लाखों लोगेंा में देरी से इस बीमारी की पहचानअपर्याप्तइलाज  अनुपयुक्त पुनर्वास सहित सुविधाअेां का अभाव है। करीब 30 साल पहले तक 60 से 70 साल की उम्र में मुंह और गले का कैंसर का कैंसर होता थालेकिन अब यह उम्र कम होकर 30 से 50 साल तक पहुंच गई। वही आजकल 20 से 25 वर्ष के कम उम्र के युवाअेंा में मुंह  गले का कैंसर देखा जा रहाहै। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी सभ्यता का पाश्चात्यकरण तथा युवाअेां में स्मोकिंग को फैशन  स्टाइल आइकान मानना है। मुंह के कैंसर के रोगियोंकी सर्वाधिक संख्या भारत में है।

भारत में पूरे विश्व की तुलाना में धूम्ररहित चबाने वाले तंबाकू उत्पाद (जर्दा,गुटखा,खैनी,) का सेवन सबसे अधिक होता है। यह सस्ता और आसानीसे मिलनेवाला नशा है। पिछले दो दशकेां में इसका प्रयोग अत्यधिक रुप से बढ़ा हैजिस कारण भी हैड नेक कैंसर के रोगी बढ़े है।

डा.शाहू बतातें है कि ’इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिर्सच द्वारा वर्ष 2008 में प्रकाशित अनुमान के मुताबिक भारत में हैड नेक कैंसर के मामलों में वृद्विदेखी जा रही है। कैंसर में इन मामलों में नब्बे फीसदी तम्बाकुमदिरा  सुपारी के सेवन से होतें है और इस प्रकार के कैंसर की रोकथाम की जा सकती है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान (आईसीएमआरकी रिपोर्ट मे भी इस बात का खुलासा किया गया है कि पुरुषों में 50 और स्त्रियों में 25 कैंसर की वजहतम्बाकू है। इनमें से 60 मुंह के कैंसर हैं। धुआ,ंरहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक यौगिक हैंइनमें से 29 रसायन कैंसर पैदा कर सकते हैं।

उन्होने कहा कि हैड नेक कैंसर के मामले राष्टीय स्वास्थ्य येाजनाअेंावंचित लोगोंपरिवारों  समुदायों पर भार बढा रहे हैं। भाग्यवश हैड नेक कैंसर सेजुडे अधिकांशमामलों में यदि बीमारी का पता पहले लग जाये तो इसे रोका जा सकता है और ईलाज भी किया जा सकता है। लेकिन लाखों लाखों लोग रोगकी देरी से पहचानअपर्याप्त ईलाज  अनुपयुक्त पुनवर्वास सुविधाओं के शिकार हो जाते है।’ जिस कारण कितनी ही मातांए  पत्नी  बहिने परिवारजनो सेवंचित हो जाती है।

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के प्राचार्य और सर्जन डापंकज चतुर्वेदी जो इस अभियान की अगुवाई वैश्विक स्तर पर कर रहे हैकहते है ’ हैड नेक कैंसर केनियंत्रण के लिये सरकारोएनजीओचिकित्सा  स्वास्थ्य कार्यकर्ताओंसामाजिक संगठनोंशिक्षा  उघोग संस्थानों सहित बहु क्षेत्रिय सहयोग कीआवश्यकता है। हैड नेक कैंसर पर प्रभावी नियंत्रण और ईलाज की और वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के लिये अंतर्राष्टीय फेडरेशन ऑफ हेड एण्ड नेकऑनोलोजिक सोसाईटिज - आईएफएचएनओएसने जुलाई 27 को विश्व सिरगला कैंसर दिवस -डब्ल्यु एचएनसीडीके रूप में मनाये जाने का प्रस्तावरखा और आज यह मनाया जाने लगा है। फेडरेशन को इसके लिये अनेक सरकारी संस्थानोंएनजीओ, 55 से अधिक सिर  गला कैंसर संस्थानों  51 देशोंका समर्थन प्राप्त है।

डा.पंकज चतुर्वेदी बतातें है कि एशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन 2008  2016 में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार 2001 में पुरुषेंा में मंुंहका कैंसर के 42725 वंही 2016 में 65205,वंही महिलाअेंा में 22080  35088, गले और श्वासं नली 49331, 75901, महिलाअेंा में 9251,14550,भोजन नली 24936  38536 वंही महिलाअेंा में 17511 28165, अमाश्य में 20537  31538 वंही महिलाअेंा में 11162  17699, फैंफड़े 39262 60730 वंही महिलाअेंा में 9525  15191,स्तन कैंसर महिलाअेां में 89914  140975, गर्भाश्य महिलाओं में 79827  125821 तथा अन्य तरह के214967  315840 तथा महिलाअेां में 166629  252410 रोगी पाए गए।

उन्होने बताया कि देश में अनेक परेशानियों के बावजूदहालंाकि गुटखे परजो की एक धुंआ रहित औधोगिक उत्पाद हैपर लगभग पूरे भारत परप्रतिबंध लग गया है। गुटखे के अलावा, 13 राज्यों ने अब उत्पादित सुगंधयुक्त चबाने वाले तम्बाकु को भी निषेध कर दिया है। ’तम्बाकु पीडितों कीआवाज’ नामक तम्बाकु पीडितों के स्वयं के द्वारा चलाये गये निरंतर आंदोलन के परिणामस्वरूप यह प्रतिबंध प्रभाव में आया। इस आंदोलन से देश के नामीकैंसर विशेषज्ञ भी जुड गये।

उन्होने बताया कि वर्ष 2014 में जॉन हॉपकिंस यूनिर्वसिटी ब्लूूमबर्ज स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गुटखा प्रतिबंध के प्रभावों परएक अध्यन करवाया। अध्ययन के दोरान देश के सात राज्योंअसमबिहारगुजरातकर्नाटकमध्यप्रदेशमहाराष्टउड़ीसा और दिल्ली में 1,001वर्तमान  पूर्व गुटखा उपभोक्ताओं और 458 खुदरा तम्बाकु उत्पाद विक्र्रताओं पर सर्वे किया गया।

इस सर्वे में सामने आया कि 90 फीसदी रिस्पोडेंन्ट्स ने इच्छा जताई कि सरकार को धुंआ रहित तम्बाकु के सभी प्रकार के उत्पादों की बिक्री औरडिस्टिब्यूशन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिये। इस पर 92 फीसदी लोगों ने प्रतिबंध का समर्थन किया। 99 फीसदी लोगों ने कहा कि भारतीय युवाओं केस्वाथ्य के लिये प्रतिबंध अच्छा है। जो लोग प्रतिबंध के बावजूद गैरकानूनी ढंग से पैकेज्ड तम्बाकु का सेवन करते है उनमें से आधे लोगों ने कहा किप्रतिबंध के बाद उनके गुटखा सेवन में कमी आई है।

80 फीसदी लोगो ने विश्वास जताया कि प्रतिबंध ने उन्हें गुटखा छोडने के लिये प्रेरित किया है और इनमें से आधे लोगों ने कहा उन्होने वास्तव में छोडने कीकोशिश भी की है।

प्रतिबंध के बाद जिन लोगों ने गुटखे का सेवन छोडा उनमें से प्रत्येक राज्य से एक बडे हिस्से -41 -88 फीसदी ने कहा कि प्रतिबंध के बाद उन्होने गुटखेका सेवन छोड दिया।

इंडेक्स ऑफ इंडिस्टरियल प्रोडक्शन -आईआईपीके आंकडो के मुताबिक सिगरेटबीडी  चबाने वाले तम्बाकु उत्पादों को उत्पाद मार्च 2015 में पिछलेवर्ष की अपेक्षा 12.1 फीसदी गिर गया।

चबाने वाले तम्बाकु उत्पाद पर प्रतिबंध के प्रभाव यूरोमोनिटर इंटरनेशनल की रिपोर्ट दर्शाती है जिसके मुताबिक धंुआरहित तम्बाकु उत्पाद में निम्नगिरावट देखी गई है - वर्ष 2011: 2 प्रतिशत 2012: 26 प्रतिशत  2013  80 प्रतिशत पूर्वानुमान के मुताबिक यह दर 2014 मे 40 फीसदी तक और2015 में करीब 35 प्रतिशत तक गिर गई। 2016 तक 30  2018 में 25 फीसदी तक गिर जायेगी। 

क्या कहते है इससे पीड़ित

भोपाल का 22 वर्षीय बृजेश कुमार दुःख भरे शब्दों में बतातें है कि नियमित गुटखा प्रयोग किया जिसका परिणाम यह हुआ कि मुहं का एक साईड काजबड़ा निकलवाना पड़ा। पारिवारिक आर्थिक तंगी के चलते इस आदत ने कैंसर जैसे रोग का परिणाम दिया और इसका पता 2015 में लगा। कैंसर विशेषज्ञचिकित्सकों से जांच कराने पर पता चला कि मुंह का कैंसर है और इसकी चार  स्टेज है। जिसका मौहल्ले के लोगों ने चंदा एकत्रित कर इसका आपरेशनकरवाया जिसमें जबड़ा निकलवाना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि आज नौकरी के लिए कंही भी जाता हूं तो मना हो जाता है। लोग मेरी शक्त देखकर हीकाम के लिए मना कर देतें है। इसके चलते परिवार  रिश्तेदारों से भी रिश्ता नही है।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें

डा.टी.पी.शाहू

9893686246

डा.सेामिल रस्तोगी

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